*दहेज के दरिंदों की हैवानियत : एंबुलेंस में उखड़ती सांसें, वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही पिलुआ की बेटी*
*’भैया! ससुराल में जानवरों की तरह पीटा… मेरे भाइयों को कुछ न हो इसलिए जहर खा लिया’; मेडिएशन सेंटर के बाहर पति ने थमाई मौत की पुड़िया, अलीगढ़ में थम रहीं मधु की सांसें*
एटा/पिलुआ
“भैया… उन्होंने मुझे जानवरों की तरह मारा, जिस्म का कोई हिस्सा ऐसा नहीं छोड़ा जहां दर्द न हो… पति ने कहा कि केस वापस नहीं लिया तो भाइयों को काट डालेगा… तुम्हारे खातिर मैंने जहर खा लिया भैया…”
एटा से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज की ओर 100 की रफ्तार से दौड़ती एंबुलेंस, गूंजता सायरन और ऑक्सीजन मास्क के भीतर से उखड़ती सांसों के बीच ये वो रूह कंपा देने वाले आखिरी शब्द थे, जो 22 वर्षीय विवाहिता मधु ने अपने आंसुओं में डूबे भाई के सीने पर सिर रखकर कहे। दहेज की हवस, ससुरालियों की हैवानियत और इंसाफ के नाम पर मेडिएशन सेंटर में समझौते के तमाशे ने पिलुआ के पृथ्वीपुर की एक और लाडली को वेंटिलेटर की चौखट पर धकेल दिया है।
थाना पिलुआ क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर निवासी स्वर्गीय राम मूर्ति की पुत्री मधु की हालत बेहद नाजुक है। अलीगढ़ में डॉक्टरों की टीम उसे वेंटिलेटर पर रखकर नब्ज बचाने की जद्दोजहद कर रही है। आरोप है कि एटा मेडिएशन सेंटर में जबरन सुलह के कागजों पर दस्तखत कराने के बाद बाहर निकलते ही पति बिंदेश उर्फ बॉबी ने उसे जहर की पुड़िया थमाते हुए कहा था— “या तो केस वापस ले, नहीं तो भाइयों को मार दूंगा… ले इसे खा और किस्सा खत्म कर!” खौफ और बेबसी के दलदल में फंसी मधु ने मायके लौटकर जहर निगल लिया।
*2 साल पहले बंधी थी गांठ, ससुराल पहुंचते ही दहेज के लिए जिस्म पर बरसीं लाठियां*
पृथ्वीपुर निवासी स्वर्गीय राम मूर्ति के परिजनों ने दो साल पूर्व अपनी सामर्थ्य से बढ़कर दान-दहेज देकर मधु के हाथ थाना मारहरा क्षेत्र के गांव ओरनी निवासी बिंदेश उर्फ बॉबी के साथ पीले किए थे। लेकिन मंडप की रस्में खत्म होते ही ससुरालियों का वहशी चेहरा सामने आ गया। अतिरिक्त दहेज और नकदी की मांग को लेकर पति बिंदेश और ससुराल के अन्य सदस्यों ने मधु पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया।
बात-बात पर गालियां, कमरे में बंद कर बेल्टों और डंडों से बेरहमी से पीटना ससुराल में रोज का नियम बन गया था। जिस्म पर पड़े काले-नीले निशान जब असहनीय मानसिक और शारीरिक नासूर बन गए, तो तंग आकर जान बचाने के लिए मधु किसी तरह अपने मायके पृथ्वीपुर लौट आई और भाइयों की शरण में रहने लगी।
*थाने से मेडिएशन सेंटर तक ‘समझौते’ का ढोंग, गेट पर दी भाइयों के कत्ल की धमकी*
ससुरालियों के खौफनाक जुल्म से आजिज आकर मधु ने थाना मारहरा में पति और ससुरालियों के खिलाफ लिखित तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई थी। मगर खाकी ने आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय मामले को ‘परिवार परामर्श’ का मुलम्मा चढ़ाकर एटा मेडिएशन सेंटर भेज दिया।
पीड़िता का आरोप है कि मेडिएशन सेंटर में उस पर सुलह करने और जबरन हस्ताक्षर करने का भारी दबाव बनाया गया। हद तो तब पार हो गई जब मेडिएशन सेंटर से बाहर निकलते ही पति बिंदेश उर्फ बॉबी ने सरेआम मधु को रोक लिया। पति ने आंखों में खौफ भरकर गुर्राते हुए कहा— “अगर तूने अपनी शिकायत वापस नहीं ली, तो तुझे तो मारूंगा ही, तेरे दोनों भाइयों को भी जिंदा नहीं छोड़ूंगा।” इतना ही नहीं, दरिंदे पति ने मधु के हाथ में जहर की पुड़िया जबरदस्ती थमा दी और खुदकुशी के लिए उकसाते हुए कहा— “ले, इसे खा ले और हमेशा के लिए ड्रामा बंद कर!”
भाइयों की सलामती के डर में निगल ली मौत, एंबुलेंस में बिलख पड़े परिजन
मायके पृथ्वीपुर पहुंचने के बाद मधु गहरे सदमे और दहशत में आ गई। एक तरफ ससुराल में झेली गई दरिंदगी का दर्द था और दूसरी तरफ पिता के साए से महरूम अपने सगे भाइयों के कत्ल का खौफ। घंटों की मानसिक कशमकश और आंसुओं के बाद, भाइयों की जिंदगी बचाने की खातिर मधु ने पति द्वारा दी गई जहर की पुड़िया फाड़कर गटक ली।
जहर पेट में जाते ही मधु तड़पने लगी और मुंह से झाग आने लगे। यह देख बदहवास परिजन उसे तत्काल एटा मेडिकल कॉलेज लेकर भागे। वहां डॉक्टरों ने हालत को बेहद चिंताजनक बताते हुए प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत अलीगढ़ रेफर कर दिया। एंबुलेंस में अलीगढ़ ले जाते वक्त मधु का शरीर नीला पड़ रहा था और वह अपने भाइयों से लिपटकर रोते हुए ससुरालियों की बर्बरता बयां कर रही थी।
*भास्कर के 3 तीखे सवाल: क्या खाकी अब भी मधु की मौत का इंतजार कर रही है?*
*कागजी सुलह की आड़ में दरिंदों को खुली छूट क्यों? जब विवाहिता लगातार अपनी जान का खतरा बता रही थी और जिस्म पर मारपीट के निशान थे, तब मारहरा पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपी पति को जेल क्यों नहीं भेजा?*
*मेडिएशन सेंटर के बाहर जहर बांटने की हिम्मत कैसे हुई? क्या सिस्टम और पुलिस का इकबाल इतना खत्म हो चुका है कि सरकारी दफ्तर के गेट पर पति खुलेआम पत्नी को जहर की पुड़िया थमाकर हत्या के लिए उकसाने का दुस्साहस कर देता है?*
*वेंटिलेटर पर उखड़ती सांसों के बाद भी गिरफ्तारी में देरी क्यों? जिंदगी और मौत के बीच झूल रही पीड़िता के बयानों और परिजनों की तहरीर के बावजूद आरोपी पति और ससुरालियों को अब तक पुलिस ने सलाखों के पीछे क्यों नहीं धकेला?*














