*शराब के आरोपों पर पुलिस का पलटवार, छात्र होने के दावे पर उठाए सवाल*
(प्रवीण की शिकायत के बाद पुलिस ने गिनाए मुकदमे, सीसीटीवी फुटेज और एफआईआर के तथ्यों की जांच की मांग)
(शिवम् सोलंकी – शान समाचार)
एटा। थाना रिजोर क्षेत्र के कस्बा रिजोर निवासी प्रवीण कुमार द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। प्रवीण ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि पुलिस उसे उसके भोजनालय से जबरन उठाकर ले गई और उसे शराब के मामले में फंसा दिया। उसने खुद को छात्र बताते हुए पुलिस कार्रवाई से अपनी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित होने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रवीण के खिलाफ दर्ज मुकदमों और उसके कथित आपराधिक इतिहास का हवाला दिया है।थाना रिजोर के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार के अनुसार, प्रवीण कस्बे में नाश्ते का छोटा होटल चलाता है। पुलिस का आरोप है कि होटल की आड़ में वहां आने वाले लोगों को उनकी मांग पर अवैध शराब उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस का यह भी कहना है कि घटना से एक दिन पहले प्रवीण थाने आया था और शराब के कारोबार को लेकर कथित रूप से लेनदेन की बात कर रहा था। पुलिस के मुताबिक थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में उसके आने-जाने की फुटेज मौजूद है।
पुलिस का कहना है कि प्रवीण को शराब का अवैध कारोबार बंद करने के लिए समझाया गया था, लेकिन इसके बावजूद कथित गतिविधियां जारी रहीं। इसके बाद पुलिस ने उसे बुलाकर पूछताछ की और कार्रवाई की।
*पुलिस ने सामने रखा आपराधिक इतिहास*,
पुलिस के अनुसार, प्रवीण कुमार पुत्र जुगेश निवासी कस्बा रिजोर के खिलाफ थाना रिजोर में वर्ष 2025 और 2026 के दौरान कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। इनमें तीन मुकदमे आबकारी अधिनियम से संबंधित बताए गए हैं।पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार—
मु0अ0सं0 134/2025 — धारा 352, 115(2), 351(2) बीएनएस।
मु0अ0सं0 152/2025 — धारा 85, 351(3) बीएनएस एवं 3/4 डीपी एक्ट।
मु0अ0सं0 23/2026 — धारा 60 आबकारी अधिनियम।
मु0अ0सं0 148/2026 — धारा 60 आबकारी अधिनियम।
पुलिस का कहना है कि प्रवीण ने अपनी शिकायत में स्वयं को छात्र बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज पूर्व मुकदमों का उल्लेख नहीं किया। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने आप में उसके दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होता; मामलों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया से होता है।
सीसीटीवी और एफआईआर के समय में अंतर का सवाल
दूसरी ओर, प्रवीण की शिकायत में कथित तौर पर दावा किया गया है कि सीसीटीवी फुटेज में दोपहर करीब 12:22 बजे पुलिसकर्मी उसे उसके भोजनालय से अपने साथ ले जाते दिखाई दे रहे हैं, जबकि पुलिस की एफआईआर में गिरफ्तारी का समय करीब 3 बजे और स्थान बिजलीघर के पास बताया गया है। यही बिंदु अब मामले में जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।यदि दोनों समयों में अंतर है तो यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि संबंधित सीसीटीवी फुटेज किस तारीख और स्थान की है, उसमें दिखाई देने वाले पुलिसकर्मी कौन हैं तथा गिरफ्तारी वास्तव में कब और कहां हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी व्यवस्था और उसके संरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश दिए हैं, जिससे ऐसे मामलों में उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
दोनों पक्षों के दावों की जांच से खुलेगा सचएक ओर प्रवीण कुमार ने पुलिस पर जबरन उठाने, झूठे मुकदमे में फंसाने और पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पुलिस इन आरोपों को निराधार बताते हुए उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों और कथित अवैध शराब कारोबार का हवाला दे रही है।अब पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज, एफआईआर में दर्ज गिरफ्तारी का समय-स्थान, पुलिस की जीडी में दर्ज विवरण तथा प्रवीण के खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर प्रवीण खुद को छात्र बता रहा है तो वह कथित रूप से शराब के कारोबार से कैसे जुड़ा? और यदि पुलिस के आरोप सही हैं तो कार्रवाई के समय और स्थान को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब क्या है? अब इन सवालों का जवाब जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आ सकेगा।
















