*नई दिल्ली / लखनऊ कार्यालय से बड़ी खबर*
*भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एवं इंटरनेशनल मीडिया आर्मी के मुख्य संयोजक, मीडिया सरकार एके बिंदुसार की कलम से*
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*ब्रेकिंग: समृद्ध भारत का रास्ता लखनऊ से निकलेगा – 29 नवंबर 2026 को मीडिया महापंचायत में होगा निर्णायक ऐलान*
*राज्यसभा और विधान परिषद में पत्रकारों-सामाजिक कार्यकर्ताओं को 50% भागीदारी दो, वरना कलम-सत्याग्रह होगा*
*नई दिल्ली।* बहुत हो चुका ज्ञापन और आश्वासन का खेल। अब फैसला होगा, और फैसला होगा लखनऊ की धरती से। समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में राजनीतिक धरातल पर मीडिया कर्मियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के खिलाफ अब निर्णायक संघर्ष की तारीख तय हो गई है।
मैं, *एके बिंदुसार*, संस्थापक – भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी, मुख्य संयोजक – इंटरनेशनल मीडिया आर्मी, देश के लाखों पत्रकारों और सामाजिक योद्धाओं की ओर से ऐलान कर रहा हूँ कि *29 नवंबर 2026 को लखनऊ में राष्ट्रीय मीडिया महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है।* यही वह दिन होगा जब इस लड़ाई का अंतिम प्रस्ताव और आगे की रणनीति पर अंतिम मुहर लगेगी।
लखनऊ क्यों? और महापंचायत क्यों?
लखनऊ केवल उत्तर प्रदेश की राजधानी नहीं है, यह देश की राजनीतिक प्रयोगशाला है। यहीं से देश की सियासत की दिशा तय होती है। इसलिए हमने इस महापंचायत के लिए लखनऊ को चुना है।
इस महापंचायत में देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 5000 से अधिक पत्रकार – प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, ग्रामीण, यूट्यूब पत्रकार, फोटो जर्नलिस्ट और 3000 से अधिक जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता, RTI एक्टिविस्ट, पर्यावरण, शिक्षा और मानवाधिकार के लिए लड़ने वाले योद्धा जुटेंगे।
यह महापंचायत कोई सेमिनार नहीं होगी। यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत होगी, जहाँ सत्ता से सवाल पूछा जाएगा।
मुख्य एजेंडा: एक ही मांग – बराबर की भागीदारी।
इसी निर्णायक फैसले पर केंद्रित होंगे।
* हमारी मांग क्या है और क्यों न्यायोचित है?
हम स्पष्ट शब्दों में मांग कर रहे हैं, जिसे लखनऊ महापंचायत में प्रस्ताव के रूप में पारित कर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सभी राज्यपालों और सभी राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को भेजा जाएगा।
मांग संख्या 1: विधान परिषद और राज्यसभा में हिस्सेदारी का फार्मूला बदलो
संविधान के अनुच्छेद 80 और अनुच्छेद 171 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा जो 12 और मनोनीत सदस्य लिए जाते हैं, वह आज राजनीतिक एहसान चुकाने का माध्यम बन गए हैं। हमारी मांग है कि इसमें 50 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से उन लोगों के लिए आरक्षित की जाएं जिनका पत्रकारिता और सामाजिक सेवा में कम से कम 10 वर्षों का निर्बाध, निष्पक्ष और जमीनी अनुभव हो।
क्यों जरूरी है?
आज सदन में वकील हैं तो कानून की व्याख्या करने के लिए, उद्योगपति हैं तो अर्थव्यवस्था की बात करने के लिए। लेकिन जनता की आवाज कौन उठाएगा? जब एक पत्रकार सदन में बैठेगा तो वह TRP के लिए नहीं, जनहित के लिए बोलेगा। जब एक सामाजिक कार्यकर्ता सदन में होगा तो वह किसी पार्टी का एजेंडा नहीं, बल्कि गरीब की झोपड़ी का एजेंडा लेकर जाएगा। तभी समृद्ध भारत बनेगा।
चयन में पारदर्शिता।
हम किसी भी राजनीतिक सिफारिश को नहीं मानते। हमारी मांग है कि चयन के लिए *राष्ट्रीय पत्रकार एवं सामाजिक सेवा चयन प्राधिकरण* का गठन हो, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, UGC के चेयरमैन और पद्म पुरस्कार प्राप्त पत्रकार शामिल हों। चयन का आधार केवल और केवल जमीनी काम हो।
लखनऊ से क्या होगा अगर मांग नहीं मानी गई? – निर्णायक संघर्ष की रूपरेखा।
29 नवंबर 2026 की लखनऊ मीडिया महापंचायत केवल प्रस्ताव पास करके खत्म नहीं होगी। वहीं से हम दूसरे चरण का ऐलान करेंगे।
कलम-सत्याग्रह:
1 दिसंबर 2026 से देश के हर जिला मुख्यालय पर पत्रकार अपनी कलम बंद कर 1 घंटे का मौन सत्याग्रह करेंगे और कलेक्टर को ज्ञापन देंगे।
सामाजिक न्याय यात्रा:
भारतीय मीडिया फाउंडेशन और इंटरनेशनल मीडिया आर्मी के बैनर तले कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक रथ यात्रा निकाली जाएगी जो हर राज्य की राजधानी में जाकर जन-समर्थन जुटाएगी।
– संसद का घेराव:
अगर फिर भी सरकार नहीं जागी तो 2027 के बजट सत्र के दौरान दिल्ली में संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च किया जाएगा।
यह लड़ाई किसी सरकार के खिलाफ नहीं है, यह व्यवस्था में सड़ चुके सिस्टम के खिलाफ है। यह लड़ाई पद पाने के लिए नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र को उसके असली प्रहरियों – पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं – को लौटाने के लिए है।
मैं देश के हर कलमकार से कहता हूँ – 29 नवंबर को लखनऊ आओ। इतिहास गवाह बनेगा। अब दिल्ली-लखनऊ के गलियारों में केवल नेताओं की नहीं, हम पत्रकारों और सामाजिक योद्धाओं की भी गूंज सुनाई देगी।
तैयार रहिए, लखनऊ तैयार है।
*जय हिंद, जय संविधान, जय मीडिया शक्ति।*














