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वरिष्ठ पत्रकार सुरेश राजभर की खास रिपोर्ट। पिंडरा (वाराणसी) में अमृत सरोवर के नाम पर 23 लाख के घोटाले का आरोप, ग्रामीणों ने लगाई जांच की गुहार बिंदा ग्राम पंचायत का मामला – कागजों में चमका तालाब, जमीन पर झाड़-झंखाड़

वरिष्ठ पत्रकार सुरेश राजभर की खास रिपोर्ट।

पिंडरा (वाराणसी) में अमृत सरोवर के नाम पर 23 लाख के घोटाले का आरोप, ग्रामीणों ने लगाई जांच की गुहार

बिंदा ग्राम पंचायत का मामला – कागजों में चमका तालाब, जमीन पर झाड़-झंखाड़

 

पिंडरा, वाराणसी में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कर जल संरक्षण को बढ़ावा देना था, वाराणसी के पिंडरा ब्लॉक की बिंदा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। यहां अमृत सरोवर के नाम पर स्वीकृत 23 लाख रुपये की राशि में बड़े घोटाले का सनसनीखेज आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि 23 लाख रुपये कागजों पर खर्च दिखाकर बंदरबांट कर लिए गए हैं, जबकि धरातल पर तालाब की स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

RTI से हुआ खुलासा, मौके पर मिली चौंकाने वाली तस्वीर

मामले का खुलासा तब हुआ जब गांव के कुछ जागरूक युवाओं ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत विकास कार्यों की जानकारी मांगी। RTI रिपोर्ट में पता चला कि बिंदा ग्राम पंचायत के पोखरे को अमृत सरोवर योजना के तहत चयनित कर उसके सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 23 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। रिपोर्ट में कार्य पूर्ण दिखाया गया है।

लेकिन जब हमारी टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की तो हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट मिली। तालाब के चारों तरफ घुटने तक झाड़-झंखाड़, जंगली घास और कूड़े का अंबार लगा हुआ है। सौंदर्यीकरण के नाम पर चारों तरफ इंटरलॉकिंग, बेंच, लाइट, पाथ-वे, घाट निर्माण जैसा कोई भी कार्य नहीं हुआ है।

नाम के लिए तालाब के किनारे कुछ गिनती के पेड़-पौधे लगाए गए हैं जो देखरेख के अभाव में सूख रहे हैं और एक तिरंगा झंडा फहराने के लिए एक छोटा सा चबूतरा बना दिया गया है। इसके अलावा अमृत सरोवर की गाइडलाइन के अनुसार कोई भी मानक कार्य पूरा नहीं किया गया है। यह देखकर लगता है जैसे खानापूर्ति के लिए दो-चार काम कराकर पूरी राशि हजम कर ली गई हो।

ग्रामीणों ने सुनाई आपबीती

इस संबंध में गांव के निवासी अरविंद कुमार यादव, गोरख यादव, मुसई यादव, रामबचन और सुभाष सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि “यह तालाब हमारे गांव की पहचान है। सरकार ने इसे सुंदर बनाने के लिए 23 लाख दिया, लेकिन प्रधान ने कागज पर ही सब काम दिखा दिया। यहां कोई सौंदर्यीकरण नहीं हुआ। अगर इतना पैसा सच में लगा होता तो यह तालाब पिंडरा का सबसे सुंदर तालाब होता।”

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान द्वारा सचिव और रोजगार सेवक की मिलीभगत से कागजों पर ही फर्जी बिल वाउचर लगाकर सरकारी धन का गबन किया गया है।

सिर्फ अमृत सरोवर ही नहीं, पूरी ग्राम सभा का विकास अवरुद्ध

ग्रामीणों ने बताया कि घोटाले का यह सिर्फ एक नमूना है। बिंदा ग्राम पंचायत में पिछले दो वर्षों से समग्र विकास कार्य पूरी तरह से अवरुद्ध पड़ा है।

1. सड़क और नाली की बदहाली: गांव की मुख्य संपर्क सड़कें जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं। जल निकासी के लिए बनी नालियां कच्ची और चोक हैं, जिससे बरसात में घरों में पानी घुस जाता है। कई जगह तो नाली निर्माण कागज पर दिखाकर पैसा निकाल लिया गया है।

2. आवास और शौचालय योजना में धांधली: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय योजना में पात्र लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है। अपात्र लोगों को रिश्वत लेकर आवास दिए जाने की शिकायतें आम हैं। कई गरीब आज भी फूस की झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।

3. मनरेगा में फर्जीवाड़ा: मनरेगा के तहत तालाब पर काम करने वाले मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन से काम कराया गया और फर्जी मस्टररोल भरकर मजदूरी की राशि का गबन किया गया। कई जॉब कार्ड धारकों ने बताया कि उनके खाते में पैसा आया ही नहीं।

4. स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था ठप: गांव में लगी सोलर लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं। पंचायत भवन पर ताला लटका रहता है और सफाई कर्मी कभी गांव में आता ही नहीं है, जबकि उसका वेतन हर महीने निकल रहा है।

अधिकारी मौन, ग्रामीणों ने लगाई न्याय की गुहार

इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने कई बार ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और पिंडरा तहसील में शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें डराया-धमकाया भी जाता है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी वाराणसी और मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी उच्च स्तरीय टीम से कराई जाए। RTI में निकले 23 लाख के खर्च का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी पाए जाने वाले ग्राम प्रधान, सचिव सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी धन की वसूली की जाए।

ग्रामीणों की एक ही मांग है कि उनके गांव के तालाब का वास्तविक सौंदर्यीकरण हो और ग्राम सभा में रुके हुए विकास कार्यों को जल्द से जल्द शुरू कराया जाए ताकि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

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