रिपोर्ट: निशा कान्त शर्मा
दौसा (डिडवाना)। जिले के डिडवाना क्षेत्र में आयोजित एक दिवसीय विशाल किसान मेले और कृषि प्रदर्शनी में आज हजारों किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा। मेले का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती की लागत को कम करना, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण और किसानों को उन्नत तकनीक से जोड़ना है।
डॉ. संजय सिंह राठौर का मुख्य संबोधन: मिट्टी की सेहत बचाना जरूरी
मेले के मुख्य तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर संजय सिंह राठौर ने किसानों को पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन में किण्वित जैविक खाद और मृदा स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया।
डॉ. राठौर ने कहा, “खेतों में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग हमारी मिट्टी को बंजर बना रहा है। जब तक हम संतुलित पोषण प्रबंधन और जैविक इनपुट्स को नहीं अपनाएंगे, तब तक खेती टिकाऊ नहीं बन सकती। किसान को अपनी लागत कम करने के लिए जैविक तरीकों और वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) की तरफ लौटना ही होगा।” उन्होंने किसानों को रासायनिक खादों के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के सही इस्तेमाल के वैज्ञानिक तरीके भी समझाए।
ड्रोन और आधुनिक तकनीकों का लाइव डेमो
मेले में आधुनिक कृषि यंत्रों की लाइव प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण रही। खेतों में कीटनाशकों के छिड़काव के लिए कृषि ड्रोन का लाइव डेमो दिया गया, जिसे देखकर किसान बेहद उत्साहित नजर आए। कम पानी में अधिक पैदावार के लिए ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम के मॉडल प्रदर्शित किए गए। कृषि विभाग के अधिकारियों ने इन आधुनिक यंत्रों और पॉलीहाउस फार्मिंग पर मिलने वाले सरकारी अनुदान (सब्सिडी) की काउंटर पर विस्तृत जानकारी दी।
सफलता की कहानियों से मिला प्रोत्साहन
इस दौरान जिले के प्रगतिशील किसानों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। छारेड़ा ग्राम पंचायत के उन किसानों के अनुभव साझा किए गए जिन्होंने खेत-तालाब (Farm Ponds) बनाकर जल संकट को दूर किया। साथ ही, पारंपरिक फसलों के बजाय नींबू, किन्नू और सहजन की बागवानी से बंपर मुनाफा कमाने वाले किसानों को मंच पर सम्मानित किया गया।
मेले में दौसा केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा समर्थित महिला स्वयं सहायता समूहोmmmmút5के जैविक उत्पादों के स्टॉल्स को भी भारी सराहना मिली। अंत में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने सभी आगुंतकों और वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया।
वैज्ञानिक डॉ. राठौर की सलाह: ‘मित्र कीटों को बचाएं,
एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अपनाएं’
शंकर देव तिवारी
😁डिडवाना)। डिडवाना में आयोजित विशाल किसान मेले में मुख्य वक्ता कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर संजय सिंह राठौर ने कीट और रोग नियंत्रण पर किसानों को विशेष तकनीकी मंत्र दिए। डॉ. राठौर ने खेतों में रसायनों के अंधाधुंध छिड़काव पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे हमारे मित्र कीट मर रहे हैं और शत्रु कीटों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है।कीट नियंत्रण के लिए डॉ. राठौर के 3 विशिष्ट तकनीकी सुझाव:प्रकाश प्रपंच और फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Traps): उन्होंने किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के महंगे खर्च से बचने के लिए खेतों में प्रति बीघा 3-4 फेरोमोन ट्रैप या लाइट ट्रैप लगाने की सलाह दी। यह तकनीक बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए हानिकारक कीटों (जैसे गुलाबी सुंडी और तना छेदक) के वयस्कों को आकर्षित कर नष्ट कर देती है।जैविक कीटनाशक (Bio-Pesticides): फसलों पर शुरुआती कीट प्रकोप दिखने पर रासायनिक दवाओं के बजाय नीम आधारित कीटनाशक (एजाडिरैक्टिन), ट्राइकोडरमा और बवेरिया बेसियाना जैसे जैविक इनपुट्स का उपयोग करने की वैज्ञानिक विधि समझाई।मित्र कीटों का संरक्षण: उन्होंने कहा कि खेतों में रहने वाली लेडीबर्ड बीटल, क्रायसोपा और मकड़ियां हमारी फसल के शत्रु कीटों (जैसे चेपा और थ्रिप्स) को खाकर प्राकृतिक रूप से नियंत्रण करती हैं। जहरीले रसायनों का छिड़काव बंद कर हम इन्हें बचा सकते हैं।















