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बासमती धान में संस्तुत कीटनाशकों का ही करें प्रयोग, अनावश्यक एवं अधिक मात्रा में कीटनाशक डालने से बचें, रिपोर्ट अनिल सोलंकी

*बासमती धान में संस्तुत कीटनाशकों का ही करें प्रयोग, अनावश्यक एवं अधिक मात्रा में कीटनाशक डालने से बचें*

 

*कीटनाशक अवशेष निर्धारित मानकों से अधिक मिलने पर प्रभावित हो सकता है बासमती चावल का निर्यात*

 

*कृषि विभाग की सलाह—कीट एवं रोग की स्थिति में विशेषज्ञों से परामर्श लेकर ही करें कीटनाशकों का प्रयोग*

 

एटा, 19 अगस्त 2026 (सू0वि0)। जिला कृषि रक्षा अधिकारी द्वारा जनपद के बासमती धान उत्पादक

कृषकों से अपील की गई है कि बासमती चावल की गुणवत्ता एवं निर्यात को बनाए रखने के लिए फसल में केवल संस्तुत एवं अनुमन्य कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में ही प्रयोग करें। बासमती चावल का विदेशों में निर्यात होने के कारण इसमें कीटनाशक अवशेष निर्धारित मानकों से अधिक पाए जाने पर निर्यात प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने बताया कि बासमती धान की फसल में आवश्यकता से अधिक अथवा हानिकारक कीटनाशकों के प्रयोग से रसायनों के अवशेष धान के दानों में रह सकते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ बासमती चावल के निर्यात पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। अतः बासमती चावल को कीटनाशी अवशेष मुक्त रखने के लिए कृषकों को कीट एवं रोग के अनुसार वैकल्पिक संस्तुत कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

कृषकों को शीथ ब्लाइट के नियंत्रण के लिए ट्राइसाइक्लाजोल के स्थान पर ट्राइकोनाजोल 25.9% EC अथवा डाइफेनोकोनाजोल 25% EC अथवा स्यूडोमोनास 0.5% WP का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इसी प्रकार फुदका के लिए बुप्रोफेजिन के स्थान पर कार्बोसल्फान 25% EC अथवा बाइफेन्थ्रिन 10% SC अथवा फिप्रोनिल 5% SC तथा तना छेदक/फुदका के नियंत्रण के लिए एसीफेट के स्थान पर कार्बोसल्फान 25% EC अथवा एसीटामिप्रिड 20% SP अथवा फिप्रोनिल 5% SC का प्रयोग किया जा सकता है।

तना छेदक, दीमक एवं पत्ती लपेटक की स्थिति में क्लोरपाइरीफास के स्थान पर बाइफेन्थ्रिन 10% SC, क्लोरपाइरीफास 75% WP अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4% GR तथा इमिडाक्लोप्रिड के स्थान पर कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4% GR, क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC अथवा लेम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 5% EC का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं प्रोपीकोनाजोल के स्थान पर शीथ ब्लाइट के नियंत्रण हेतु टेबुकोनाजोल 25.9% EC, डाइफेनोकोनाजोल 25% EC अथवा स्यूडोमोनास 0.5% WP का प्रयोग किया जा सकता है।

इसी प्रकार पत्ती लपेटक/फुदका के लिए थायोमेथाक्साम के स्थान पर कार्बोसलफान 25% EC, लेम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 5% EC अथवा क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC तथा तना छेदक के नियंत्रण के लिए प्रोफेनोफॉस के स्थान पर कार्बोसलफान 25% EC, फिप्रोनिल 5% SC अथवा लेम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 5% EC के प्रयोग की सलाह दी गई है। झोंका रोग की स्थिति में हेक्साकोनाजोल के स्थान पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP, एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% SC अथवा डाइफेनोकोनाजोल 25% EC तथा कार्बेन्डाजिम के स्थान पर टेबुकोनाजोल 25.9% EC, डाइफेनोकोनाजोल 25% EC अथवा स्यूडोमोनास 0.5% WP का प्रयोग किया जा सकता है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कृषकों से विशेष रूप से अपील की है कि बासमती धान में किसी भी कीटनाशक का अनावश्यक अथवा निर्धारित मात्रा से अधिक प्रयोग न करें। कीट एवं रोग की स्थिति में कृषि विभाग के अधिकारियों अथवा कृषि रक्षा इकाई से परामर्श लेकर ही कीटनाशक का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि संस्तुत कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में प्रयोग करने से बासमती चावल की गुणवत्ता, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य तथा इसके निर्यात की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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