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सरकार और खेल संघों पर अफसरशाही हावी : पूनम तिवारी, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

सरकार और खेल संघों पर अफसरशाही हावी : पूनम तिवारी

 

आगरा/इटावा। सरकार कोई भी हो, खिलाड़ियों के लिए सही योगदान नहीं दे पा रही है। खिलाड़ियों में से निकले अधिकारी ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। यह आरोप भारोत्तोलन की महिला एनआईएस व ओलंपिक संघ की सदस्य पूनम तिवारी ने लगाया। वह उत्तर प्रदेश योग एसोसिएशन के आमंत्रण पर इटावा में आयोजित प्रदेश की दसवीं चैंपियनशिप में शामिल होने पहुंची थीं।

 

पूनम तिवारी ने कहा कि प्रतिभा खोज से लेकर योजनाएं बनाने और टीमों के चयन तक अफसरशाही का कॉकस बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वह वेटलिफ्टिंग की खिलाड़ी रही हैं और राष्ट्रीय स्तर तक खेलने के बावजूद आगे नहीं बढ़ सकीं। इसके बाद उन्हें नॉन-ओलंपिक खेलों की ओर रुख करना पड़ा। आगे खेलने की तैयारियां और अपनी बात रखने की कोशिशें भी प्रभावित हुईं।

 

उन्होंने कहा कि लखनऊ जैसे बड़े शहरों में खुलेआम खेल और खिलाड़ियों को हतोत्साहित किया जाता है। खेल अधिकारी और बोर्ड के लोग अपनी प्रतिष्ठा बनाने के लिए आयोजनों को प्रभावित करते हैं, लेकिन योजनाएं बनाते समय उनमें दखल देकर खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का मनोबल गिराते हैं।

 

खिलाड़ियों को विभाग और संघों के छत्र से मुक्त करने की जरूरत

 

पूनम तिवारी ने खेल व्यवस्था की कई खामियां गिनाते हुए खिलाड़ियों को विभाग और संघों के छत्र से मुक्त करने की बात कही। उन्होंने पीटी उषा जैसे खिलाड़ियों के होते हुए भी कामों में हस्तक्षेप की निंदा की। साथ ही पुराने श्रेष्ठ खिलाड़ियों के अनुभव का लाभ उठाने की जरूरत बताई।

 

17 साल तक अस्थायी प्रशिक्षक रहीं

 

पूनम तिवारी हरदोई की हैं। उन्हें 17 साल तक अस्थायी तौर पर प्रशिक्षक रखा गया। इस दौरान खेल नीतियां बनती-बिगड़ती रहीं। उनका कहना है कि एक राष्ट्रीय स्तर की वेटलिफ्टर को पावरलिफ्टिंग और पंजा कुश्ती जैसे खेलों में खिलाड़ी से लेकर प्रशिक्षक तक की भूमिका निभाकर समय बिताना पड़ रहा है।

 

स्वदेशी खेलों पर कब्जे की कोशिश का आरोप

 

पूनम तिवारी ने चिंता जताते हुए कहा कि बड़े खेल, जो आकाओं के हाथ में हैं, स्वदेशी खेलों को कब्जाने की फिराक में हैं। उन्होंने कहा कि इन खेलों और प्रतिभाओं के हक के लिए सभी को सजग रहना पड़ेगा।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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