WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

42501 रुपए 15 आना और पांच पैसे का खर्चा आया था आगरा कालेज के निर्माण मे, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*42501 रुपए 15 आना और पांच पैसे का खर्चा आया था आगरा कालेज के निर्माण मे*

*सोशल मीडिया पर जीवन्त होगा आगरा कालेज का 203 वर्ष का गौरवपूर्ण इतिहास, देश के जाने माने लोग रह चुके हैं यहां के छात्र*

*आरए मूवीज की डॉक्यूमैन्ट्री फिल्म यह है- आगरा कालेज का मुहूर्त उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने किया*

आगरा। एक घंटे की डॉक्यूमैन्ट्री फिल्म ब्रिटिश काल में स्थापित आगरा कालेज के 203 वर्ष के गौरवपूर्ण इतिहास को खुद में समेटे नजर आएगी। आरए मूवीज द्वारा निर्मित फिल्म यह है आगरा कालेज में 1823 में स्थापित आगरा कालेज के लिए प्राप्त जमीन, बनाने में आने वाला खर्चा, यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले देश के जाने माने चेहरे, शैक्षिक व्यवस्था सहित सम्पूर्ण जानकारी होगी। जिसे देखकर आगरावासी वाह ताज नहीं वाह आगरा कालेज अवश्य बोलेंगे और अपने शहर के इस ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान पर गर्व महसूस करेंगे।फिल्म का उद्घाटन आज कालेज में प्राचार्य कार्यालय के पास उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने गणेश पूजन कर क्लैप देकर व श्रीफल फोड़कर किया। कहा कि आगरा कालेज लगभग दो शताब्दियों से अधिक समय से राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला रहा है। जिसने भारत के बौद्धिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को दिशा दी। बताया कि वह खुद भी आगरा कालेज के छात्र रहे हैं। फिल्म निर्माता रंजीत सामा ने जानकारी देते हुए बताया कि कालेज के बारे में विभिन्न सूत्रों से तथ्यपूर्ण और सटीक जानकारी जुटाने का पूरा प्रयास किया गया है। 1823 में कालेज का निर्माण में 42501 रुपए 15 आना और पांच पैसे का खर्चा आया था। 1826 में यहां 117 विद्यार्थियों की संख्या 1828 में बढ़कर 210 पहुंच गई थी। और आज यहां 18 हजार से अधिक विद्यार्थी सिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ज्वलंत विषयों भूगोल, खगोल, ज्योतिष शास्त्र और गणित की शिक्षा के साथ प्रारम्भ हुआ आगरा कालेज आज हर विषय की शिक्षा प्रदान करने के साथ आधुनिकता और विरासत का अनूठा संगम बन चुका है। अंग्रेजों के हुकूमत काल में उत्तर भारत में शिक्षा की लौ जलाने वाले आगरा कालेज ने पीड़ितों को ऐसे दौर में कानून की ताकत दी जब न्याय भी सत्ता की ताकत से बंधा हुआ था। लॉ फैकेल्टी 1850 में शुरू हुई थी, यहां से पहला ग्रेजुएट विद्यार्थी 1855 में हुआ। फिल्म के लेखर व निर्देशक हेमन्त वर्मा है। इस अवसर पर मुख्य रूप से विजय सामा, प्रमोद वर्मा, सतेन्द्र तिवारी, ब्रजेश चंद्रा, संजय दुबे व कालेज के शिक्षक आदि उपस्थित थे।
*संस्थान नहीं है केवल ये, इतिहास की एक धरोहर है…*
आगरा। फिल्म के मूहूर्त के साथ फिल्म के गाने संस्थान नहीं है केवल ये, इतिहास की एक धरोहर है, देश की गौरवमयी शिक्षा का अद्भुद ज्ञान सरोबर है… भी रिलीज किया गया। जिसे संजय दुबे द्वारा लिखा गया है। कालेज के उप प्राचार्य पीबी झा ने बताया कि कालेज के प्रमुख प्राचार्यों में आज भी टीसी जॉन्स, केसी मेहता, एम रे, डब्ल्यू एंडरसन, एसएन दुबे, मुख्तियार सिंह के नाम आज भी याद किए जाते हैं। सांसद एसपी सिंह बघेल आगरा कालेज में अध्यापन कार्य कर चुके हैं। फिल्म के निर्माता रंजीत सामा भी आगरा कालेज के विद्यार्थी रह हैं।
ये रहें हैं आगरा कालेज का विद्यार्थी
पं. मोतीलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, भारतीय जनसंघ के संस्थापक-श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय, भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारी लाल नन्दा, उप्र के पहले मुख्यमंत्री पं. गोविन्द बल्लभ पंत, पूर्व उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरूप पाठक, पूर्व राष्ट्रपति संकरदयाल शर्मा, पूर्व हाईकमिश्नर भगवान सिंह, प्रतिष्ठित वकील सर तेज बहादुर सप्रू, संवतंत्रता सेनानी पं. केडी पालीवाल, भारत के राष्ट्रीय सलाहकार अजित डोभाल, साहित्यकार बनारसीदास चतुर्वेदी, पूर्व सांसद राज बब्बर, पूर्व सांसद स्व. भगवान शंकर रावत सहित लम्बी सूची के आगरा कालेज के विद्यार्थियों की जिन्होंने देश विदेश में भारत को नई पहचान दी। आगरा के लोगों में आगरा कालेज के छात्र के रूप में सांसद राजकुमार चाहर, अचला नागर, हिन्दुस्तान समाचार पत्र के ग्रुप एडीटर शशि शेखर, उदयन शर्मा, राजेन्द्र सचदेवा, रामजीलाल सुमन, पूरन डाबर, किशोर खन्ना, प्रशान्त पौनिया जैसे नाम शामिल हैं। कैसे प्राप्त हुई कालेज के लिए जगह
आगरा। कालेज के प्राचार्य सीके गौतम ने बताया कि 1796 में ग्वालियर के राजा दौलतराम सिंधिया ने आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार के लिए बिहार के रहने वाले शिवभक्त व ग्वालियर राजघराने के कुलपुरोहित पं. गंगादर शास्त्री को आगरा, चौमोहा और इगलास की तीन जागीरें दी थीं। 1813 में पंडित जी के निधन के बाद जमीन को लेकर वारिसों में विदाद हो गया। मामला अलीगढ़ कलेक्टर के पास पहुंचा, जिसमें जमीन का एक चौथाई भाग पंडित जी के वारिसों व तीन चौथाई भाग आमजन की भलाई के लिए निश्चित किया। इसी क्रम में 1823 में यहां आगरा कालेज की स्थापना की गई। हाल ही में प्राचार्य निवास के पास अतिक्रमण की गई कालेज की 25 बीघा जगह को कब्जे से मुक्त भी कराया गया है।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

Leave a Comment