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11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन लकड़ी की टेक पर, विभाग ने सड़क पर लटकाया ‘मौत का फंदा, रिपोर्ट डॉ कृपाल सिंह मानव

*बिजली विभाग की अंधी लापरवाही: जान से खिलवाड़ का अजब ‘इंजीनियरिंग मॉडल’*

*11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन लकड़ी की टेक पर, विभाग ने सड़क पर लटकाया ‘मौत का फंदा’*

*आंधी से टूटा पोल तो नया लगाने के बजाय बल्ली के सहारे तिरछा अड़ाकर भूले जिम्मेदार*

*नगला परसी मार्ग से गुजरने वाले सैकड़ों राहगीरों की जान हलक में; बेल बजती रही, पर SDO ने नहीं उठाया फोन*

एटा/निधौली कलां विद्युत वितरण निगम के अफसरों की संवेदनहीनता और लापरवाही किस कदर इंसानी जिंदगी को दांव पर लगा सकती है, इसका खौफनाक और शर्मनाक नमूना निधौली कलां/मुईउद्दीनपुर विद्युत सब-स्टेशन क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यहां ग्राम पंचायत हिम्मतपुर काकामई के नगला परसी गांव के पास सड़क किनारे से गुजर रही 11 केवी (11,000 वोल्ट) की मुख्य हाईटेंशन लाइन का एक सीमेंटेड पोल तेज आंधी में टूटकर सड़क पर गिर गया था। कायदे से विभाग को तत्काल नया पोल लगाकर आपूर्ति बहाल करनी चाहिए थी, लेकिन कर्मचारियों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए पोल को एक सूखी लकड़ी के खंभे (बल्ली) के सहारे तिरछा टिका दिया।

अब यह ‘जुगाड़’ पर टिका 11 केवी का भारी-भरकम पोल राहगीरों के सिर पर साक्षात यमदूत बनकर झूल रहा है। कभी भी एक तेज हवा का झोंका या कंपन इस लकड़ी को गिरा सकता है, जिससे सड़क पर गुजर रहा कोई भी वाहन या राहगीर जिंदा जलकर राख हो सकता है।

*सड़क पर बिछाया मौत का लाइव ट्रैप, हजारों लोगों की आवाजाही*

नगला परसी से होकर गुजरने वाला यह रास्ता ग्रामीण अंचल का मुख्य संपर्क मार्ग है। दिन-रात यहां से स्कूल बसें, ट्रैक्टर-ट्रॉली, बाइक सवार और पैदल राहगीर गुजरते हैं। सड़क के ठीक मुहाने पर 11 हजार वोल्ट का करंट ढो रहा भारी पोल सिर्फ एक कमजोर लकड़ी के सहारे तिरछा टिका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि विभाग द्वारा आम जनता के लिए बिछाया गया सीधा ‘मौत का जाल’ है। यदि यह पोल किसी चलते वाहन पर गिर गया, तो होने वाली भीषण जनहानि की भरपाई कौन करेगा?

*सड़क पर झूलती खुली मौत*

*सड़क पर झूलती इस खुली मौत को लेकर जब निधौली कलां क्षेत्र के एसडीओ फोर्थ के सरकारी नंबर पर लगातार संपर्क साधा गया, तो साहब की मनमर्जी का आलम यह रहा कि उन्होंने कई बार घंटी बजने के बावजूद फोन रिसीव करना तक मुनासिब नहीं समझा। वातानुकूलित दफ्तरों में बैठे अफसरों को शायद सड़क पर घिसटती आम जनता की जान की कोई परवाह नहीं है।*

एसडीओ के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के बाद जब संबंधित अवर अभियंता (जेई) प्रेम प्रताप पुंडीर से बात की गई, तो उन्होंने रटा-रटाया सरकारी जवाब दिया— “मामला अभी आपके जरिए संज्ञान में आया है, इसे जल्द ठीक करा दिया जाएगा।”

*भास्कर के तीन सीधे सवाल:*

*क्या 11 हजार वोल्ट की लाइन लकड़ी की टेक पर चलाने का कोई नया सरकारी नियम आया है?*

*सड़क पर पोल टूटे कई दिन बीत जाने के बाद भी क्या लाइनमैनों ने अफसरों को रिपोर्ट नहीं दी या अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं?*

*यदि इस बीच लकड़ी खिसक गई और कोई बड़ा हादसा हुआ, तो क्या विभाग के लापरवाह अफसरों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज होगा?*

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