महाराज महेंद्र रिपुदमन सिंह भदवार वालीबाल का आगाज
बाह. आजमगढ़ और जाट रेजिमेंट बरेली के मध्य खेले गये ड्रा मैच के साथ शुक्रवार को यहां जूनियर हाई स्कूल के मैदान पर महाराज महेंद्र रिपुदमन सिँह वालीबाल का आगाज हुआ. शनिवार को और रविवार को वालीबाल प्रतियोगिता चलेगी.।
आज़ प्रतियोगिता की शुरुआत बड़े महाराज को स्मरण के साथ हुई. सबसे पहले आजमगढ़ और जाटरेजिमेंट बरेली की टीमों से मुख्य अथिति सत्यवीर और लाल सिंह से परिचय हुआ.। इसके बाद वेस्ट ऑफ टू सेट का मैच हुआ. जिसमें दोनों टीम एक एक सेट जीत ड्रा पर खेले.। निर्णायक थे चंद्र भान मिश्र और धनजय राय।
उद्घोषक मुकेश शर्मा अरुण दुवे कृपा नरायण.।
आयोजन समिति के सचिव ह्रदय नरायण शर्मा ने बताया प्रतियोगिता में अभी तक आजमगढ़, बरेली, करनाल, यू पी पुलिस, प्रयागराज, स्पर्ट्स हास्टल लखनऊ के आलावा कृष्णा लार्ड एकेडमी की टीम आ चुकी हैं. समीफ़ाइनल तक के मैच कल और परसों फाइनल दौर के मैच होंगे.
सह सचिव मुकेश शर्मा ने बताया है कि प्रतियोगिता महाराज महेंद्र रिपुदमन सिंह भड़ावर के नाम से है..राजा महेंद्र रिपुदमन सिंह भदावर (1942–1991) उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की ऐतिहासिक भदावर रियासत के महाराजा और राज्य के एक प्रतिष्ठित राजनीतिज्ञ थे।
यहाँ उनका संक्षिप्त जीवन परिचय दिया गया है:
जन्म एवं वंश: उनका जन्म सन् 1942 में आगरा के प्रसिद्ध भदावर राजपूत राजवंश में हुआ था। वह बटेश्वर और बाह क्षेत्र के पारंपरिक महाराजा थे।
राजनैतिक पहचान: वे आगरा की बाह (Bah) विधानसभा सीट से 4 बार (1957, 1974, 1977 और 1980) विधायक (MLA) चुने गए। उन्होंने 1957 में पहली बार एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
मंत्री पद: उत्तर प्रदेश सरकार में उन्होंने 1977 से 1979 के दौरान पर्यटन, वन, खेलकूद और युवा कल्याण कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया।
प्रमुख योगदान: उन्हें बाह और पिनाहट के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और चंबल नहर परियोजना की शुरुआत करने के लिए ‘विकास पुरुष’ के रूप में जाना जाता है।
पारिवारिक विरासत: उनका विवाह ओडिशा के पटना राज्य के महाराजा की सुपुत्री महारानी ब्रज श्री देवी से हुआ था। उनके निधन (1991) के बाद उनके पुत्र राजा अरिदमन सिंह (6 बार विधायक) और वर्तमान में उनकी पुत्रवधू रानी पक्षालिका सिंह (वर्तमान विधायक) उनकी राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
क्षेत्र की जनता के बीच वे आज भी ‘बड़े महाराज साहब’ के नाम से अत्यधिक सम्मानित हैं।















