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निघासन तहसील में जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद, महिला के पुराने दस्तावेजों के बावजूद आवेदन निरस्त करने का आरोप

लखीमपुर खीरी से पप्पू सिंह की खास रिपोर्ट 

  • कानूनगो और तहसीलदार पर अभद्रता से बात करने का आरोप, महिला बोली—2007 से मायके में रह रही हूं, फिर ससुराल पक्ष से लिखवाकर लाने का दबाव क्यों?
  • जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में उलझी महिला का जरूरी फॉर्म अप्लाई करने का मौका छूटा, परेशान महिला ने उठाए सवाल

निघासन, लखीमपुर खीरी। निघासन तहसील में पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर एक महिला की परेशानी का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला ने तहसीलदार धर्मेंद्र मणि त्रिपाठी और संबंधित कानूनगो पर अभद्रता से बात करने तथा जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में अड़चन डालने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद उसके आवेदन को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उससे ससुराल पक्ष से लिखवाकर लाने और वहीं से आवेदन कराने की बात कही गई, जबकि महिला के मुताबिक वर्ष 2007 से ही वह अपने मायके में रह रही है और ससुराल पक्ष से उसका कोई संबंध नहीं है।

महिला का आरोप है कि जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील में प्रक्रिया पूरी करने के दौरान उसे लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा। मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि प्रमाण पत्र बनवाने के चक्कर में उसका एक जरूरी फॉर्म अप्लाई करने का अवसर भी छूट गया। इससे महिला काफी परेशान है और अब वह सवाल उठा रही है कि आखिर उसकी इस परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा?

वर्ष 2007 से मायके में रहने का दावा, फिर ससुराल पक्ष से दस्तावेज क्यों?

पीड़ित महिला का कहना है कि वर्ष 2007 में आपसी सहमति से उसका ससुराल पक्ष से रिश्ता समाप्त हो गया था। महिला के अनुसार, उस समय न तो कोई न्यायालयी कार्रवाई हुई थी और न ही कोई लिखित समझौता हुआ था। इसके बाद से वह अपने मायके में ही रह रही है।

महिला का सवाल है कि जब वह पिछले कई वर्षों से मायके में रह रही है, तो जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उसे ससुराल पक्ष से लिखवाकर लाने के लिए क्यों कहा जा रहा है? उसका कहना है कि यदि प्रमाण पत्र जारी करने के लिए किसी विशेष दस्तावेज की आवश्यकता है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए, ताकि वह नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सके।

महिला के मुताबिक, ससुराल पक्ष से उसका लंबे समय से कोई संपर्क नहीं है। ऐसे में वहां से लिखवाकर लाने की बात उसके लिए और अधिक परेशानी का कारण बन रही है। महिला चाहती है कि उसके मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाए।

आधार कार्ड समेत दस्तावेज होने के बावजूद आवेदन निरस्त करने का आरोप

महिला ने आरोप लगाया कि जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय उसने आधार कार्ड समेत अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। उसके अनुसार, दस्तावेजों की जांच किए जाने के बावजूद आवेदन निरस्त कर दिया गया।

इस घटनाक्रम के बाद महिला के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि वह अपने जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को आगे कैसे बढ़ाए। महिला का कहना है कि यदि उसके आवेदन में कोई कमी थी, तो उसे इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए थी, जिससे वह समय रहते आवश्यक कागजात उपलब्ध करा सकती।

महिला की मांग है कि उसके आवेदन को निरस्त करने के आधार की जानकारी दी जाए और संबंधित दस्तावेजों की नियमानुसार दोबारा समीक्षा की जाए। हालांकि, आवेदन निरस्त करने का आधिकारिक कारण और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही इस संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अधिकारियों पर अभद्रता से बात करने का आरोप

पीड़ित महिला ने तहसीलदार धर्मेंद्र मणि त्रिपाठी और संबंधित कानूनगो पर अभद्रता से बात करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि जब वह अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास पहुंची, तो उसके साथ सम्मानजनक तरीके से बातचीत नहीं की गई।

महिला का आरोप है कि उससे ससुराल पक्ष से लिखवाकर लाने और वहीं से आवेदन कराने की बात कही गई। इससे वह असमंजस में पड़ गई कि जब वह वर्ष 2007 से मायके में रह रही है, तो उसकी समस्या का समाधान किस प्रकार होगा।

महिला ने सवाल उठाया कि सरकारी कार्यालयों में अपनी समस्याएं लेकर आने वाले लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। यदि किसी आवेदन में कोई कमी है, तो संबंधित व्यक्ति को उसकी जानकारी देकर नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि उसे बार-बार परेशान न होना पड़े।

हालांकि, अधिकारियों पर लगाए गए अभद्रता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

जाति प्रमाण पत्र के चक्कर में छूट गया जरूरी फॉर्म अप्लाई करने का मौका

इस पूरे मामले में महिला की परेशानी उस समय और बढ़ गई, जब जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में उलझने के कारण उसका जरूरी फॉर्म अप्लाई करने का अवसर छूट गया।

महिला का कहना है कि यदि समय रहते उसके आवेदन का निस्तारण हो जाता या उसे आवश्यक दस्तावेजों के बारे में स्पष्ट जानकारी दे दी जाती, तो वह अपना जरूरी फॉर्म समय पर अप्लाई कर सकती थी। लेकिन आवेदन निरस्त होने और ससुराल पक्ष से दस्तावेज लाने की बात के चलते वह इस प्रक्रिया में उलझी रही।

महिला के मुताबिक, अब उसका जरूरी फॉर्म अप्लाई करने से छूट गया है, जिसके कारण वह काफी परेशान है। उसके लिए यह केवल जाति प्रमाण पत्र बनवाने का मामला नहीं रह गया, बल्कि जरूरी फॉर्म भरने का अवसर भी गंवाने की चिंता से जुड़ गया है।

महिला का सवाल है कि जब किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता के कारण कोई व्यक्ति सरकारी कार्यालय के चक्कर लगाता है, तो उसे समय पर सही जानकारी और उचित मार्गदर्शन क्यों नहीं मिलना चाहिए? यदि दस्तावेजों में कोई कमी थी, तो उसे स्पष्ट कर दिया जाता, जिससे वह आवश्यक सुधार कर सकती थी और अपने दूसरे जरूरी काम को भी समय पर पूरा कर पाती।

आखिर महिला की परेशानी का जिम्मेदार कौन?

महिला की शिकायत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि आवेदन में कोई कमी थी, तो क्या महिला को उसके बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई थी? आवेदन निरस्त करने का आधिकारिक आधार क्या था? वर्ष 2007 से मायके में रहने के महिला के दावे के बावजूद उससे ससुराल पक्ष से दस्तावेज लाने के लिए कहने का क्या कारण था? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया के दौरान महिला का जरूरी फॉर्म अप्लाई करने का अवसर छूटने से उसे जो परेशानी हुई, उसका समाधान कैसे होगा?

इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है। साथ ही, महिला के आवेदन और उपलब्ध दस्तावेजों की नियमानुसार समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग

पीड़ित महिला ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अपने जाति प्रमाण पत्र के आवेदन पर नियमानुसार विचार करने और उसे आवश्यक प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। महिला चाहती है कि उसकी समस्या का समाधान किया जाए, ताकि उसे अनावश्यक रूप से तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें।

फिलहाल, महिला के आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। आवेदन निरस्त करने का कारण, प्रस्तुत दस्तावेजों की स्थिति और जरूरी फॉर्म अप्लाई करने का अवसर छूटने से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी महिला की शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं

Shakeer Akhtar
Author: Shakeer Akhtar

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