*जलेसर तहसील में स्थानांतरण आदेश की खुली अवहेलना: पद के विपरीत मनमानी ड्यूटी, जिम्मेदार अधिकारी चुप*

*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*
*एटा/जलेसर।* जनपद एटा से तहसील जलेसर स्थानांतरित होकर आए कर्मचारियों द्वारा स्थानांतरण आदेश में उल्लिखित पद के विपरीत कार्यालय में मनमर्जी से ड्यूटी करने की शिकायत सामने आई है। आदेश में जिस पदनाम के साथ तैनाती दी गई थी, उसके उलट कर्मचारी अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। यह स्थिति सरकारी सेवा के मूल अनुशासन और पदस्थापन आदेश की अवहेलना मानी जा रही है।जानकारी के अनुसार, संबंधित कर्मचारी जनपद स्तर से स्थानांतरित होकर जलेसर तहसील में आए हैं। आदेश में स्पष्ट पद का उल्लेख होने के बावजूद वे उसी पद पर कार्यभार ग्रहण करने और उसी कार्य को करने के बजाय कार्यालय में अपनी पसंद के अनुसार ड्यूटी कर रहे हैं। कार्यालयाध्यक्ष स्तर पर भी इस अनियमितता पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है।सरकारी सेवा नियमों के तहत स्थानांतरण आदेश बाध्यकारी होता है। कर्मचारी उसी पद पर कार्य करने के लिए बाध्य है, जिसके लिए आदेश जारी हुआ है। आदेश के विपरीत कार्य करना अनुशासनहीनता और उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाता है। स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण न करना या गलत पद पर कार्य करना विभागीय कार्रवाई का आधार बन सकता है। इस अवहेलना की पहली जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों की है। इसके साथ ही तहसीलदार जलेसर की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि कार्य आवंटन और उपस्थिति सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है। उप-जिलाधिकारी जलेसर और जिलाधिकारी एटा का पर्यवेक्षण भी इस मामले में सवालों के घेरे में है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति चलने पर यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला बन जाता है।प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि तत्काल जांच कर कर्मचारियों को आदेश में दिए गए पद पर कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। कार्यालयाध्यक्ष से स्पष्टीकरण लिया जाए कि आदेश के विपरीत ड्यूटी क्यों लगाई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत विभागीय कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है। जिला प्रशासन से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी प्राप्त नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी स्तर से सख्त निर्देश जारी करने की मांग की जा रही है, ताकि स्थानांतरण आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित हो सके और मनमानी पर रोक लगे।
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