*अलीगंज में सपा के सामने बड़ा सवाल*
*रामेश्वर-जुगेंद्र के बिना क्या बनेगा नया राजनीतिक समीकरण?*
*रिपोर्टर मौ0रियाज अब्बास*
एटा। अलीगंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों समाजवादी पार्टी को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। लखनऊ में सपा के एक कार्यक्रम से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव, उनके परिवार और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव को लेकर तरह-तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।
वायरल वीडियो में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और रामेश्वर सिंह यादव के पुत्र सुबोध यादव के बीच बातचीत दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसे आने वाले समय में संगठन और टिकट को लेकर संभावित बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि रामेश्वर सिंह यादव और जुगेंद्र सिंह यादव के समर्थक अपने नेताओं के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि, अभी तक सपा नेतृत्व की ओर से रामेश्वर सिंह यादव या उनके परिवार को लेकर किसी निष्कासन अथवा टिकट में बदलाव की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे कयासों को फिलहाल राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अलीगंज में मुकाबला रहा है करीबी
अलीगंज विधानसभा क्षेत्र में पिछले विधानसभा चुनाव का परिणाम भी इस राजनीतिक चर्चा को महत्वपूर्ण बनाता है। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा के सत्यपाल सिंह राठौर को 1,02,873 मत मिले थे, जबकि सपा प्रत्याशी रामेश्वर सिंह यादव को 99,063 मत प्राप्त हुए। दोनों के बीच केवल 3,810 मतों का अंतर रहा था।
ऐसे में आगामी चुनाव को लेकर प्रत्याशी और स्थानीय राजनीतिक समीकरण का सवाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सपा किसी नए चेहरे को मैदान में उतारती है तो स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
रामेश्वर-जुगेंद्र परिवार की मौजूदगी पर चर्चा
रामेश्वर सिंह यादव और जुगेंद्र सिंह यादव लंबे समय से एटा की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। दोनों भाइयों की स्थानीय राजनीति में मौजूदगी और उनके समर्थकों का नेटवर्क अक्सर राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा रहा है।
समर्थकों का कहना है कि दोनों नेताओं ने कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी समाजवादी पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक नजदीकी बनाए रखी। उनका दावा है कि जिले में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक आज भी दोनों नेताओं से जुड़े हुए हैं।
वहीं, दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व के सामने चुनावी रणनीति, स्थानीय समीकरण और नए चेहरों को मौका देने जैसे कई पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए आने वाले समय में पार्टी का फैसला ही स्थिति को स्पष्ट करेगा।
जिला पंचायत की राजनीति भी जुड़ी है चर्चा से
रामेश्वर सिंह यादव और जुगेंद्र सिंह यादव के परिवार की जिला पंचायत की राजनीति में भी मौजूदगी रही है। वर्तमान में रेखा यादव एटा जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं। ऐसे में विधानसभा के साथ-साथ जिला पंचायत की स्थानीय राजनीति में भी इस परिवार की भूमिका को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
समर्थकों का मानना है कि परिवार की राजनीतिक सक्रियता को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। वहीं राजनीतिक तौर पर यह भी देखा जाना बाकी है कि आगामी चुनाव में सपा नेतृत्व स्थानीय प्रभाव और संगठनात्मक समीकरणों को किस तरह संतुलित करता है।
अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में
फिलहाल वायरल वीडियो के बाद अलीगंज की राजनीति में चर्चाएं जरूर तेज हो गई हैं, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। राजनीति में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और चुनाव के समय सामने आने वाली आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होता है।
अलीगंज में पिछले चुनाव का करीबी मुकाबला, रामेश्वर-जुगेंद्र परिवार की स्थानीय राजनीतिक मौजूदगी और सपा के संभावित प्रत्याशी को लेकर चर्चाएं—इन सबके बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी रामेश्वर-जुगेंद्र परिवार के साथ आगे बढ़ेगी या अलीगंज में नए राजनीतिक समीकरण की तलाश करेगी?
आने वाले दिनों में सपा नेतृत्व का फैसला अलीगंज की राजनीति की दिशा को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ कर सकता है।














