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न्यायालय के स्टे के बावजूद विवादित चकरोड पर निर्माण, पुलिस की तत्परता से रुका कार्य, रिपोर्ट एस डी पाण्डेय

न्यायालय के स्टे के बावजूद विवादित चकरोड पर निर्माण, पुलिस की तत्परता से रुका कार्य

 

 

सोनभद्र। राबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के मौजा बट में विवादित चकरोड को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। काश्तकारों ने आरोप लगाया कि माननीय न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद ठेकेदार द्वारा विवादित भूमि पर जबरन मिट्टी डलवाकर सड़क निर्माण कराया जा रहा था। हालांकि सूचना मिलते ही चौकी सुकृत पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य तत्काल रुकवा दिया, जिससे माननीय न्यायालय के आदेश के उल्लंघन होने से बचाया जा सका।

छेदीलाल सहित अन्य सह-कास्तकारों ने बताया कि वह आराजी संख्या-17, मौजा बट, परगना अहरौरा के संक्रमणीय सह-कास्तकार भूमिधर एवं काबिज हैं। आरोप है कि आराजी संख्या-18 स्थित चकरोड को लेकर वर्ष 2000 से विवाद चला आ रहा है। उस समय हरिशरण उर्फ पल्टू आदि द्वारा उनकी निजी भूमि के बीच से जबरन चकरोड निकालने का प्रयास किया गया था, जिसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा।

ग्रामीणों के अनुसार सिविल जज जूनियर डिवीजन, चुनार मिर्जापुर की अदालत में दाखिल मूलवाद संख्या-163/2002 में न्यायालय ने 25 जुलाई 2002 को विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण अथवा चकरोड बनाए जाने पर स्थगन आदेश जारी किया था। काश्तकारों का दावा है कि उक्त आदेश आज भी प्रभावी है।

किसानों ने बताया कि वर्ष 2004 में भी ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन तत्कालीन खंड विकास अधिकारी राबर्ट्सगंज ने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कार्य रुकवा दिया था। इसके बाद भी समय-समय पर विवादित भूमि पर निर्माण कराने की कोशिशें होती रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2014 में लेखपाल एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा कराई गई पैमाइश में भी यह रिपोर्ट दी गई थी कि चकरोड संख्या-18 वास्तविक रूप से आराजी संख्या-17 में स्थित है तथा मूल चकरोड अपने निर्धारित स्थान पर नहीं बना है। इसके बावजूद दोबारा निर्माण कराने का प्रयास किया गया।

मामले की जानकारी मिलने पर चौकी सुकृत पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल निर्माण कार्य बंद कराया। ग्रामीणों ने पुलिस की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो सकता था तथा क्षेत्र में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के स्थगन आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा भविष्य में दोबारा विवादित भूमि पर निर्माण कराने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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