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आईपीएल के 19 वें सीजन शुरू होते हीं गिरिडीह में सट्टेबाज गिरोह हो गये

अमित अग्रवाल गिरिडीह झारखंड

 

 

 

आईपीएल के 19 वें सीजन शुरू होते हीं गिरिडीह में सट्टेबाज गिरोह हो गये सक्रिय, आईपीएल के हर एक मैच में लग रहा है लाखों का सट्टा, गिरिडीह के कई लोग गिरोह में शामिल, सट्टेबाजों की हर दिन हो रही है लाखों की कमाई, ऑनलाईन गेमिंग बंद होने के बाद भी बेखौफ चल रहा है खेल

 

गिरिडीह. आईपीएल के 19 वें सीजन की शुरूआत 28 मार्च से शुरू हो चुका है और यह पूरा आईपीएल का टूर्नामेंट 31 मई तक चलेगा. आईपीएल के सीजन के शुरू होते ही जिले का एक ऐसा वर्ग है जो काफी सक्रिय हो जाता है और आईपीएल के एक सीजन में करोङों रूपये की अवैध कमाई कर लेता है. यह पूरी कमाई ऑनलाईन गेमिंग साईट सट्टेबाजी के जरीये की जाती है. इस खेल में कई सफेदपोशों की भी भूमिका संदिग्द्य रहती है और इतना ही नहीं गिरिडीह के कई बङे – बङे व्यापारी वर्ग के लोग भी इस खेल में जुङे हुए है जो हर दिन लाखों की अवैध कमाई कर रहे हैं ओर ऑनलाईन गेमिंग बंद होने के बाद भी यह अवैध कारोबार बेखौफ चल रहा है.

 

कैसे होता है यह पूरा सट्टेबाजी का खेल समझें

 

आईपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट के शुरू होने के बाद क्रिकेट प्रेमियों के अलावा एक वर्ग ऐसा भी होता है जो मैच के टॉस से लेकर हर बॉल को गंभीरता से देखता है और हर गेंद पर दांव लगाता है. सट्टे के इस खेल में कोई एक झटके में कंगाल हो जाता है, तो कोई एक झटके में मालामाल हो जाता है.

 

कोङ वर्ड पर होता है पूरा सट्टे का खेल

सट्टे का बाजार कोड वर्ड का है और इस खेल में कोड है. खास बात यह है कि सट्टा लगाने वाले शख्स को लाइन कहा जाता है, जो एजेंट यानी पंटर के जरिये से बुकी (डिब्बे) तक बात करता है. इस सट्टेबाज गिरोह में अपनी किस्मत आजमानें के लिए लोगों को एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है, जिसकी एक लिमिट होती है. सट्टे के भाव को डिब्बे की आवाज बोला जाता है. सट्टेबाज 20 ओवर को लंबी पारी, दस ओवर को सेशन और छह ओवर तक सट्टा लगाने को छोटी पारी खेलना कहते हैं. मैच की पहली गेंद से लेकर टीम के जीत तक भाव चढ़ते-उतरते हैं.

 

गिरोह के लोग करते हैं प्रतिबंधित लिंक तैयार और फिर करते जो़ङते हैं लोगों को

 

सट्टेबाजी गिरोह को चलाने वाले धंधेबाज जिस नाम के होते हैं या तो उसी नाम से या फिर किसी और नाम से प्रतिबंधित लिंक तैयार करते थे और यूजर आईडी व पासवर्ड के जरिए लोगों को ऑनलाइन सट्टेबाजी में जोड़ते है. लेन-देन के लिए भाड़े के बैंक खातों का उपयोग किया जाता है, जिससे शासन को कर के रूप में आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है.

 

कैसे लगता है रुपया :

आईपीएल मैच के दौरान सट्टे के इस खेल में मैच शुरू होने से पहले दोनों टीम का रेट जारी किया जाता है, जो हर गेंद से लेकर टीम की जीत तक भाव चढ़ते-उतरते हैं. इसी दौरान मैच में सट्टा लगाने वाले अपनी मनपसंद टीम पर भाव के हिसाब पर रुपया लगाते है. अगर टीम जीत जाती है तो भाव के हिसाब से रुपया मिलता है और अगर टीम हार जाती है, तो एजेंट को रुपया देना होता है.

 

व्यापारियों से लेकर युवा तक शामिल :

 

इस खेल में शहर के व्यापारियों से लेकर युवा तक शामिल हैं. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के सट्टा बाजार के मास्टर लोकल एजेंट्स के माध्यम इस बार के आइपीएल में भी अपना कारोबार झारखंड सहित अन्य राज्यों में फैलाए हुए हैं. नए ग्राहक सोच-समझकर बना रहे हैं और पुराने ग्राहक पहले से इनके संपर्क में है.

अपराधी छवि के व्यक्ति के द्वारा होती है रुपए की वसूली

 

मिली जानकारी के अनुसार, गिरिडीह में आईपीएल के मैच के दौरान सट्टा लगाने वाले कई एजेंट ऐसे हैं, जिनका अपराधी किस्म के लोगों से कनेक्शन है. ये एजेंट अपराधी किस्म के लोगों के जरिये ही पैसा वसूली करते हैं और रुपये बड़े एजेंट को पहुंचाने का काम कर रहे हैं. यह पूरा नेटवर्क लैपटॉप, मोबाइल,वाइस रिकॉर्डर वगैरह पर ही चलता है. मिली जानकारी के अनुसार, इसमें एजेंटों को नेता से लेकर अपराधी किस्म के लोगों का संरक्षण प्राप्त रहता है. हालांकि यह खेल पिछले कई साल से चल रहा है. पुलिस की सुस्त रवैये से इनका खेल आज भी जारी है. गिरिडीह में फिलहाल पचंबा का रहने वाला तोता नामक युवक के अलावे, अशोक, सुकांत, छोटू, फिरोज, अफ़ज़ल, रोहित सिंह, मुमताज़, सचिन, दिलीप, धीरज समेत एक बड़े स्टेबाज जिसे गिरोह के सदस्य जालान साहेब के नाम से बुलाते हैं, के अलावे कई लोग इस गिरोह में शामिल हैं ओर हर दिन लाखों की कमाई कर रहे हैं.

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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