प्रेम चंद किसी एक भाषा क़े नहीं वरन वे तो बोलचाल की भाषा क़े लेखक थे :अरुण डंग
आगरा.। मुंशी प्रेम चंद किसी विशेष भाषा क़े लेखक नहीं वे भारतीय बोल चाल की भाषा क़े लेखक थे.
ये बात आज यहाँ प्रेम चंद उर्दू वाले प्रेम चंद हिंदी वाले विषय पर मुख्य वक्ता क़े रूप में बोलते हुए अरुण डंग ने कही. समय था प्रेम चंद की पुण्यतिथि पर आयोजित गोष्ठी का.
उन्होंने कहा कि मुख्य वक्ता अरुण डंग ने अपने संबोधन में कहा, “प्रेमचंद का साहित्य किसी धर्म, जाति या संकीर्ण भाषाई दायरे में नहीं बंधा है। उन्होंने उस भाषा को चुना जिसे भारत का आम आदमी समझता और बोलता था। उनकी भाषा में हिंदी की सरलता और उर्दू की मिठास का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि आज भी उनकी कहानियां हर भारतीय के दिल को छूती हैं।”
गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो रामवीर सिंह ने की. संचलन नजरीन बेगम औऱ विषय प्रवर्तन अंकित ने रखा. संयोजक थे अनिल शुक्ल.
इस समय मनीषा शुक्ला, शंकर देव तिवारी, रमेशमुस्कान, रामबाहदुर उपदध्याय, सुनयन शर्मा, अरुण बघेळ औऱ महेश धाकड़ गिरधारी लाल शर्मा एडवोकेट मौजूद थे.














