WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

सील के पीछे चमत्कार एलडीए की छांव में रोशन हो रही हैं अवैध इमारतें,BMF News

*सील के पीछे चमत्कार एलडीए की छांव में रोशन हो रही हैं अवैध इमारतें!*

 

*ताले पर ताला, अंदर उजाला, एलडीए की सीलिंग का नया जादू!*

 

*संवाददाता मोहम्मद सैफ साबरी*

राजधानी लखनऊ की फिजाओं में एक ही सवाल चीख-चीख कर गूंज रहा है। आखिरकार लखनऊ विकास प्राधिकरण के शातिराना प्रवर्तन तंत्र की इस कलाकारी को क्या नाम दिया जाए? जब कानून के लंबे हाथों ने किसी अवैध इमारत पर अपनी मुहर लगा दी, उसके दरवाजे पर सीमेंट-ईंट का पहरा बैठा दिया, तो फिर उसी सील कब्रगाह के भीतर बिजली की रोशनी किसकी शह पर जगमगा रही है?

 

यह सवाल महज़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस दीमक का पर्दाफाश है जो एलडीए के तथाकथित जीरो टॉलरेंस के खोखले दावों की चूलें हिला रहा है।

 

प्रवर्तन जोन-6 मॉडल हाउस में केशव भवन के पीछे का नजारा हो या खंदारी बाजार चौकी के आसपास का इलाका, हर तरफ अवैध निर्माणों पर एलडीए की मेहरबानी का खुला खेल जारी है। जनता पूछ रही है कि जब सीलिंग की तलवार लटक चुकी है, तो उस इमारत में मीटर की टिक-टिक कैसे सुनाई दे रही है?

 

जिम्मेदारों की आंखें मूंदी हैं या नीयत में खोट? क्या सील करने के बाद जोन-6 के जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह और संबंधित अवर अभियंता ने कभी पलटकर देखने की जहमत उठाई? या फिर सील लगाकर फाइलों को ठंडे बस्ते में डालना ही उनकी कार्यशैली का एकमात्र हिस्सा रह गया है?

 

विद्युत विभाग से सांठगांठ का काला खेल: यदि सीलिंग के बाद नियमानुसार बिजली विभाग को सूची भेजी जाती है, तो फिर उन धड़कते कनेक्शनों को काटा क्यों नहीं गया? जुलाई 2026 में लखनऊ में सील भवनों के बिजली कनेक्शन काटे जाने के ढिंढोरे पीटे गए थे, तो फिर मॉडल हाउस से खंदारी बाजार तक के इन खास भवनों पर वह कानून बेदम क्यों हो जाता है?

 

गरीब आदमी अपने आशियाने की एक ईंट भी रखे तो हथौड़ा चलाने वाला एलडीए, इन मालदारों के आलीशान महलों के आगे अचानक लाचार क्यों नजर आता है?

 

अब वक्त आ गया है कि एलडीए के नुमाइंदे फाइलों के एसी कमरों से बाहर निकलकर इन तीखे सवालों का सामना करें। क्या सील किए गए भवनों की नियमित निगरानी का कोई रिकॉर्ड जनता के सामने लाने की हिम्मत इस विभाग में बची है? सीलिंग के बाद मौके की कौन सी फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसके दम पर बिजली के अवैध मीटर धड़ल्ले से दौड़ते रहे? क्या किसी रसूखदार के दबाव में इन इमारतों पर सिर्फ कागजी कार्रवाई का तमाशा रचा गया?

 

यह सवाल सिर्फ ईंट, गारे और सीमेंट का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो आम नागरिक इस व्यवस्था पर करता है। यदि सील लगी इमारतों में इस तरह से बिजली के कनेक्शन दौड़ते रहेंगे और अधिकारी सिर्फ अपनी पीठ थपथपाते रहेंगे, तो जनता यह मानने पर मजबूर हो जाएगी कि एलडीए की यह कार्रवाई न्याय नहीं, बल्कि महज़ वसूली और मिलीभगत का एक नायाब नाटक है।

 

अब जरूरत किसी नए नोटिस की नहीं, बल्कि मॉडल हाउस से लेकर खंदारी बाजार तक के सभी सील भवनों की संयुक्त और निष्पक्ष जांच की है, ताकि इन अंधेरे कमलों में रोशनी पहुंचाने वाले चेहरों को बेनकाब किया जा सके!

 

क्या आपको लगता है कि सिर्फ अधिकारियों के तबादले से लखनऊ के इन अवैध निर्माणों और बिजली के इस काले खेल पर लगाम लगाई जा सकती है, या इसके पीछे की पूरी व्यवस्था को ही भंग करने की जरूरत है?

 

Leave a Comment