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लम्पी स्किन डिसीज से गौवंश को बचाने के लिए पशुपालक बरतें सावधानी, रिपोर्ट शिव सिंह

*लम्पी स्किन डिसीज से गौवंश को बचाने के लिए पशुपालक बरतें सावधानी*

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*लक्षण दिखाई देते ही तत्काल पशु चिकित्सक अथवा टोल फ्री नम्बर 1962 पर करें संपर्क*

 

*एटा, 10 सितम्बर 2026 (सू0वि0)।* मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा० राम प्रकाश शर्मा ने जनपद के पशुपालकों से अपील की है कि गौवंश को लम्पी स्किन डिसीज (LSD) से बचाव एवं संक्रमण के प्रभावी प्रबन्धन के लिए विशेष सावधानी बरतें। उन्होंने कहा कि संक्रमित पशुओं को समय से अलग करना तथा साफ-सफाई एवं कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना बीमारी के प्रसार को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से कम से कम 10 मीटर दूर किसी हवादार शेड में तत्काल अलग बांधा जाए। लम्पी स्किन डिसीज का वायरस मक्खियों, मच्छरों एवं पिस्सुओं के काटने से फैल सकता है। इसके लिए पशु शेड में नीम के पत्तों का धुआं करने के साथ ही सुरक्षित कीटनाशकों का छिड़काव किया जाए। शेड को पूरी तरह साफ एवं सूखा रखा जाए तथा फिनाइल अथवा सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे कीटाणुनाशकों का नियमित रूप से छिड़काव किया जाए।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने पशुपालकों को सलाह दी कि संक्रमित पशुओं को चरने के लिए बाहर न भेजें। संक्रमित पशुओं के खाने-पीने के बर्तन, बाल्टी, रस्सी आदि को स्वस्थ पशुओं के पास इस्तेमाल न करें और उपयोग से पूर्व उन्हें अच्छी तरह सैनिटाइज करें। उन्होंने कहा कि बीमारी के उपचार में अंधविश्वास या देरी न करें तथा केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहते हुए समय से पशु चिकित्सक की सलाह लें। गंभीर स्थिति में उपचार में देरी पशु के जीवन के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती है।

उन्होंने बताया कि संक्रमित पशु की देखभाल के दौरान उसे आसानी से पचने वाला हरा चारा, दलिया तथा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ एवं ताजा पानी उपलब्ध कराया जाए। त्वचा पर बनी गिल्टियों अथवा घावों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄) के पानी से साफ किया जाए तथा नीम के तेल अथवा एंटीसेप्टिक मलहम का उपयोग किया जा सकता है, ताकि घावों पर मक्खियां न बैठें।

डा० राम प्रकाश शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाए तो उसके शव को खुले में न फेंका जाए। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए शव के निस्तारण हेतु पशु चिकित्सक/स्थानीय प्रशासन द्वारा बताई गई सुरक्षित विधि अपनाई जाए तथा गहरे गड्ढे में नियमानुसार नमक एवं चूना डालकर शव को दफनाया जाए।

उन्होंने जनपद के सभी पशुपालकों से अपील की कि गौवंश में लम्पी स्किन डिसीज के लक्षण दिखाई देने पर घबराएं नहीं, बल्कि पशु को तत्काल अन्य पशुओं से अलग कर नजदीकी पशु चिकित्सक अथवा टोल फ्री नम्बर 1962 पर संपर्क करें। समय पर पहचान, पृथक्करण एवं उचित पशु चिकित्सा से बीमारी के प्रसार को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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