*चेक बाउंस मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त*
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यदि चेक किसी कंपनी के खाते से जारी हुआ है
तो नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कंपनी को आरोपी बनाए बिना उसके डायरेक्टर या अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के खिलाफ आपराधिक शिकायत आगे नहीं बढ़ाई जा सकती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनी एक ‘कानूनी व्यक्ति’ है और ऐसे मामलों में उसे पक्षकार बनाना अनिवार्य है
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी एक ‘कानूनी व्यक्ति’ होती है
यदि चेक किसी कंपनी के खाते से जारी किया गया है,
तो कंपनी को आरोपी बनाए बिना उसके डायरेक्टर या अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के खिलाफ चेक बाउंस की शिकायत पर आगे कार्रवाई नहीं की जा सकती
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त किया
जिसमें ट्रायल कोर्ट को मामले में कंपनी को आरोपी बनाने का निर्देश दिया गया था









